
भारत में मां दुर्गा को पूजने के दो तरीके हैं — एक व्रत से, दूसरा वर्जन से। जी हां! बात हो रही है नवरात्र और दुर्गा पूजा की — एक ही देवी, पर अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग ट्रीटमेंट। आप सोच रहे होंगे, “मां तो एक ही हैं, फिर पूजा का स्टाइल क्यों बदला-बदला सा है?”
तो चलिए, इस दोगुनी भक्ति और दोहरी मस्ती के पीछे का रहस्य खोलते हैं…
नवरात्र: नौ रातों की साधना और सादगी का संगम
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शुरुआत: 22 सितंबर 2025
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समापन: 1 अक्टूबर 2025 (बुधवार)
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जगह: उत्तर भारत, गुजरात, महाराष्ट्र
क्या होता है नवरात्र में?
नवरात्र का मतलब होता है – नौ दिन, नौ रातें, नौ देवियां, और नौ बार मम्मी से पूछा गया सवाल: “आज व्रत में क्या खाऊं?”
हर दिन देवी दुर्गा के एक रूप की पूजा होती है — शैलपुत्री से लेकर सिद्धिदात्री तक। भक्त व्रत रखते हैं, सात्विक भोजन खाते हैं और तामसिक चीजों से दूर रहते हैं… यानि समोसे और चाय को अलविदा!
दुर्गा पूजा: जब बंगाल कहता है – “पार्टी ऑन, देवी इज़ इन टाउन!”
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अवधि: 5 दिन का महा-उत्सव
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लोकेशन: पश्चिम बंगाल, ओडिशा, असम, बंगाली कम्युनिटी
दुर्गा पूजा का मिज़ाज कैसा होता है?
यहां देवी के महिषासुर पर विजय का जश्न होता है, यानी “जब देवी जी ने राक्षस को पीटकर कहा – बुराई हटाओ, अच्छाई लाओ!”
पूरे शहर में पंडाल, लाइटिंग, ढाक की आवाज़ और रबड़ी-रसगुल्ले की बहार होती है। लोग एक-दूसरे को “Shubho Durga Pujo” कहते हैं और नए कपड़े पहनकर हर रात पंडाल दर्शन को निकलते हैं – थोड़ा दर्शन, थोड़ा ड्रेस शो!
Main Difference: जब पूजा की शैली बन जाए पहचान
| तत्व | नवरात्र | दुर्गा पूजा |
|---|---|---|
| अवधि | 9 दिन | 5 दिन |
| मुख्य क्षेत्र | उत्तर भारत, गुजरात | बंगाल, ओडिशा, असम |
| फोकस | नौ स्वरूपों की पूजा | महिषासुर मर्दिनी की विजय |
| भोजन | सात्विक उपवास भोजन | भोग, मिठाई, और फुल-फैट फूड |
| वातावरण | ध्यान, मंत्र, व्रत | म्यूज़िक, रंग, नाटक, पंडाल |
| Mood | स्पिरिचुअल और शांत | कल्चरल और करंट |
तो फिर एक ही देवी के दो त्योहार क्यों?
“मां एक, भक्ति अनेक!”
क्योंकि भारत एक नहीं, अनेक भारतों का मेल है। कहीं मां को तपस्या और साधना से मनाया जाता है, तो कहीं संगीत और सांस्कृतिक जलसे से। बंगाल में मां दुर्गा को ‘बेटी की घर वापसी’ की तरह देखा जाता है — “मां आई हैं मायके!”
वहीं, उत्तर भारत में ये आध्यात्मिक साधना की प्रक्रिया है — “आओ आत्मा को डिटॉक्स करें”
जब व्रत और वर्जन भिड़ें
अगर उत्तर भारत का भक्त कहे – “मैं व्रत पर हूं”, तो बंगाल वाला बोले – “चलो, भोग का एक्स्ट्रा प्लेट मेरा!” जहां एक तरफ फल-फ्रूट-फीका खाना, वहीं दूसरी तरफ रसगुल्ला-शोंदेश का फ्लेवर बम!
चाहे व्रत से या वाइब से
इसमें कोई हार-जीत नहीं है। नवरात्र और दुर्गा पूजा दोनों ही मां दुर्गा की शक्ति, करुणा और न्याय का उत्सव हैं। बस तरीका अलग है – एक जगह ध्यान है, दूसरी जगह ढाक!
तो इस साल चाहे आप कन्या पूजन करें या कुमारी पूजा, मां दुर्गा की कृपा बनी रहे – यही असली ‘विनिंग ट्रॉफी’ है!
When you say ‘व्रत’ in North India vs ‘भोग’ in Bengal
“North India: फलाहार + पूजा, Bengal: रसगुल्ला + DJ
Devi Maa: मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता बेटा, बस मन साफ रखो!”
“ट्रॉफी मिली नहीं, फिर भी सूर्या ने मनाया ऐसा जश्न की पाक जल-भुन गया!”

